मकान मालिक रहें सावधान, Supreme Court का किराया विवाद पर बड़ा फैसला!

By gaurav

Published On:

Supreme court

Supreme Court : अगर आप किराए के मकान में रहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने किरायेदारों को बड़ी राहत देते हुए एक ऐसा फैसला सुनाया है जिससे अब किराया न दे पाने की मजबूरी को अपराध नहीं माना जाएगा। यानी अब ऐसी स्थिति में आपके खिलाफ आईपीसी के तहत केस दर्ज नहीं किया जा सकेगा।

क्या है मामला?

यह मामला दो पक्षों के बीच किराए को लेकर हुए विवाद का है। मकान मालिक ने किरायेदार पर किराया न देने की शिकायत की थी और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की कोशिश की। मामला पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट गया, जहां एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि अगर कोई किरायेदार किसी मजबूरी में समय पर किराया नहीं दे पाता है, तो उसे अपराध नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि:

यह भी पढ़े:
Rbi new rule 500 notes 500 के नोट पर RBI ने दिया बड़ा आदेश! आम जनता में मची हड़कंप – RBI New Rule 500 Notes
  • किराया न दे पाने की स्थिति में आईपीसी की धाराएं जैसे 415 (धोखाधड़ी) और 403 (भरोसे के उल्लंघन) लागू नहीं होंगी।
  • ऐसा मामला सिविल प्रकृति का है, न कि आपराधिक।
  • ऐसे विवादों को सिविल रेमेडी (जैसे किराया वसूली या बेदखली के लिए सिविल कोर्ट में मामला) के तहत निपटाया जाना चाहिए।

एफआईआर भी रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया और कहा कि मकान मालिक की शिकायत भले ही सही हो, लेकिन किराया न दे पाने को आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए यह आदेश दिया।

किरायेदारों को क्या फायदा?

  • अब मजबूरी में किराया न देने पर जेल या एफआईआर का डर नहीं रहेगा
  • मकान मालिक सिर्फ सिविल कोर्ट में वसूली का दावा कर सकता है, आपराधिक कार्रवाई नहीं।
  • यह फैसला देशभर के लाखों किरायेदारों के लिए एक मिसाल (नजीर) बनेगा।

मकान मालिकों के लिए क्या रास्ता?

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किराया नहीं मिलता है, तो मकान मालिक सिविल प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर सकते हैं, जैसे कि:

  • किराया वसूली का मुकदमा
  • संपत्ति खाली करवाने का नोटिस या केस

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ करता है कि हर किराया विवाद को आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता। मजबूरी में किराया न दे पाना अपराध नहीं है। यह फैसला किरायेदारों के हक में है और उन्हें बेवजह कानूनी डर से बचाता है। अगर आप किरायेदार हैं, तो अब थोड़ी राहत जरूर महसूस कर सकते हैं।

यह भी पढ़े:
Da hike DA हाइक का तोहफा: पेंशनभोगियों और कर्मचारियों की जेब होगी भारी – DA Hike

Leave a Comment